हिंदी भाषा को सही ढंग से पढ़ने, लिखने और समझने के लिए वर्ण और वर्णमाला का ज्ञान होना आवश्यक है। किसी भी भाषा का निर्माण छोटी-छोटी ध्वनियों से होता है। इन ध्वनियों को व्यवस्थित रूप में समझने के लिए वर्ण, वर्णमाला, स्वर और व्यंजन का अध्ययन किया जाता है।
इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि वर्ण किसे कहते हैं, वर्णमाला की परिभाषा क्या है, वर्ण के कितने भेद होते हैं, स्वर किसे कहते हैं और व्यंजन किसे कहते हैं।
वर्ण की परिभाषा – Varn Ki Paribhasha
वर्ण भाषा की सबसे छोटी ध्वनि इकाई है, जिसके और छोटे टुकड़े नहीं किए जा सकते। दूसरे शब्दों में, किसी भाषा की वह सबसे छोटी मूल ध्वनि जो अपने आप में पूर्ण हो और जिसे और विभाजित न किया जा सके, उसे वर्ण कहते हैं।
Varn Kise Kahate Hain – वर्ण किसे कहते हैं?
सरल शब्दों में कहें तो भाषा में प्रयुक्त मूल ध्वनियों को वर्ण कहा जाता है।
उदाहरण
अ, आ, इ, ई, क, ख, ग, च, व आदि वर्ण हैं।
उदाहरण के माध्यम से इसे और आसानी से समझ सकते हैं—
राम = र + आ + म + अ
गया = ग + अ + य + आ
इन शब्दों में प्रयुक्त मूल और अविभाज्य ध्वनियों को वर्ण कहा जाता है। प्रत्येक वर्ण का एक लिखित रूप भी होता है, जिसे उसकी लिपि या वर्ण-संकेत कहा जाता है।
वर्णमाला की परिभाषा – Varnmala Ki Paribhasha
किसी भाषा में प्रयोग होने वाले सभी वर्णों के व्यवस्थित समूह को वर्णमाला कहते हैं।
सरल शब्दों में—
Varnmala Kise Kahate Hain – वर्णमाला किसे कहते हैं?
किसी भाषा के सभी वर्णों का क्रमबद्ध समूह वर्णमाला कहलाता है।
हर भाषा की अपनी अलग वर्णमाला होती है। उदाहरण के लिए—
- हिंदी वर्णमाला – अ, आ, इ, ई, क, ख, ग, घ आदि।
- अंग्रेजी वर्णमाला – A, B, C, D, E आदि।
इस प्रकार वर्ण भाषा की सबसे छोटी इकाई है, जबकि अनेक वर्णों के व्यवस्थित समूह को वर्णमाला कहा जाता है।
वर्ण के भेद – Varn Ke Bhed
हिंदी भाषा में वर्ण मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं—
- स्वर
- व्यंजन
अब इन दोनों को विस्तार से समझते हैं।
स्वर किसे कहते हैं? – Swar Kise Kahate Hain
जिन वर्णों का उच्चारण करने के लिए किसी दूसरे वर्ण की सहायता की आवश्यकता नहीं पड़ती, उन्हें स्वर कहते हैं।
दूसरे शब्दों में, जिन ध्वनियों का उच्चारण स्वतंत्र रूप से किया जा सकता है, वे स्वर कहलाती हैं।
उदाहरण—
अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ए, ऐ, ओ, औ आदि।
स्वरों के उच्चारण के दौरान मुख से निकलने वाली वायु सामान्य रूप से बिना किसी बड़े अवरोध के बाहर आती है।
हिंदी में स्वर
हिंदी वर्णमाला में सामान्य रूप से निम्न स्वर पढ़ाए जाते हैं—
अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ए, ऐ, ओ, औ, अं, अः
कुछ पारंपरिक वर्णमाला सूचियों में स्वर और उनके वर्गीकरण की संख्या अलग-अलग रूपों में दी जा सकती है।
स्वर के भेद – Swar Ke Bhed
स्वरों को मुख्य रूप से दो भागों में बांटा जाता है—
- मूल स्वर
- संयुक्त स्वर
1. मूल स्वर
जो स्वर स्वतंत्र रूप से मूल रूप में पाए जाते हैं, उन्हें मूल स्वर कहा जाता है।
उदाहरण—
अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ए, ओ
2. संयुक्त स्वर
दो स्वरों के मेल से बनने वाले स्वरों को संयुक्त स्वर कहते हैं।
उदाहरण—
- ऐ = अ + ए
- औ = अ + ओ
मूल स्वर के भेद
उच्चारण में लगने वाले समय के आधार पर मूल स्वरों को तीन प्रकारों में विभाजित किया जाता है—
- ह्रस्व स्वर
- दीर्घ स्वर
- प्लुत स्वर
1. ह्रस्व स्वर किसे कहते हैं?
जिन स्वरों का उच्चारण करने में कम समय लगता है, उन्हें ह्रस्व स्वर कहते हैं।
उदाहरण के रूप में—
अ, इ, उ, ऋ
ह्रस्व स्वरों का उच्चारण अपेक्षाकृत कम समय में पूरा हो जाता है।
2. दीर्घ स्वर किसे कहते हैं?
जिन स्वरों के उच्चारण में ह्रस्व स्वरों की तुलना में अधिक समय लगता है, उन्हें दीर्घ स्वर कहा जाता है।
सरल भाषा में, जिन स्वरों को बोलने में अपेक्षाकृत अधिक समय लगता है, वे दीर्घ स्वर कहलाते हैं।
उदाहरण—
आ, ई, ऊ, ए, ऐ, ओ, औ
स्वरों के संयोग से बनने वाले कुछ रूप इस प्रकार समझे जा सकते हैं—
- आ = अ + अ
- ई = इ + इ
- ऊ = उ + उ
- ए = अ + इ
- ऐ = अ + ए
- ओ = अ + उ
- औ = अ + ओ
3. प्लुत स्वर किसे कहते हैं?
जिन स्वरों के उच्चारण में दीर्घ स्वर से भी अधिक समय लगता है, उन्हें प्लुत स्वर कहते हैं।
सरल शब्दों में, जिस स्वर के उच्चारण में लगभग तीन मात्राओं का समय लगे, वह प्लुत स्वर कहलाता है।
इसका प्रयोग प्रायः किसी को दूर से पुकारने या ध्वनि को लंबा खींचकर बोलने के लिए किया जाता है।
जैसे—
राऽऽम, सुनोऽऽ, ओऽऽम्
हिंदी के सामान्य लेखन में प्लुत स्वर का प्रयोग बहुत कम होता है, जबकि प्राचीन और वैदिक भाषा में इसका अधिक उपयोग मिलता है।
अयोगवाह किसे कहते हैं?
हिंदी वर्णमाला में कुछ ध्वनियाँ ऐसी होती हैं जिन्हें सामान्य रूप से न तो स्वर और न ही व्यंजन की श्रेणी में रखा जाता है। ऐसी ध्वनियों को अयोगवाह कहा जाता है।
अयोगवाह में मुख्य रूप से निम्न चिह्न शामिल किए जाते हैं—
- अनुनासिक
- अनुस्वार
- विसर्ग
- निरनुनासिक
1. अनुनासिक (ँ)
जिस ध्वनि के उच्चारण के समय वायु मुख और नाक दोनों से निकलती है, उसे अनुनासिक कहते हैं।
इसका चिह्न चंद्रबिंदु (ँ) है।
उदाहरण—
गाँव, दाँत, आँसू, आँगन, चिड़ियाँ
2. अनुस्वार (ं)
अनुस्वार एक विशेष ध्वनि-चिह्न है, जिसे बिंदु (ं) के रूप में लिखा जाता है।
उदाहरण—
अंगूर, अंक, अंश, रंग, कंकन
3. विसर्ग (ः)
जिस ध्वनि के उच्चारण में हल्की ‘ह’ जैसी ध्वनि का अनुभव होता है, उसे विसर्ग कहा जाता है।
इसका चिह्न (ः) है।
उदाहरण—
अतः, स्वतः, दुःख, मनःकामना, पयःपान
4. निरनुनासिक
जिन ध्वनियों के उच्चारण में वायु केवल मुख से निकलती है और नासिका का प्रयोग नहीं होता, उन्हें सामान्य रूप से निरनुनासिक कहा जाता है।
उदाहरण—
इधर, उधर, अपना, आप, घर
अनुस्वार और अनुनासिक में अंतर
अनुस्वार और अनुनासिक दोनों का संबंध नासिक्य ध्वनियों से है, लेकिन इनके प्रयोग और चिह्न में अंतर होता है।
| आधार | अनुनासिक | अनुस्वार |
| चिह्न | ँ | ं |
| उच्चारण | मुख और नाक दोनों की सहायता से | नासिक्य ध्वनि के संकेत के रूप में |
| उदाहरण | गाँव, आँसू, दाँत | अंक, अंग, अंश |
अनुनासिक का प्रयोग सामान्यतः चंद्रबिंदु के माध्यम से किया जाता है, जबकि अनुस्वार को बिंदु द्वारा दर्शाया जाता है।
उदाहरण—
- दाँत
- आँत
- अँगूठा
- अंक
- अंग
स्वरों की मात्राएँ
जब अ के अतिरिक्त अन्य स्वर किसी व्यंजन के साथ प्रयोग किए जाते हैं, तो उन्हें मात्रा के रूप में लिखा जाता है। हिंदी में अ की कोई अलग मात्रा नहीं होती।
उदाहरण—
क् + अ = क
क् + आ = का
क् + इ = कि
क् + ई = की
नीचे कुछ प्रमुख स्वरों और उनकी मात्राओं को समझा जा सकता है—
| स्वर | मात्रा | उदाहरण |
| अ | कोई मात्रा नहीं | कमल |
| आ | ा | राम |
| इ | ि | दिन |
| ई | ी | तीर |
| उ | ु | गुलाब |
| ऊ | ू | फूल |
| ऋ | ृ | कृषक |
| ए | े | केला |
| ऐ | ै | मैना |
| ओ | ो | कोमल |
| औ | ौ | सौरभ |
| अं | ं | अंगूर |
| अः | ः | दुःख |
जब किसी व्यंजन में स्वर ध्वनि का प्रयोग नहीं होता, तो उसके साथ हलंत (्) लगाया जाता है।
जैसे—
क्, ख्, ग्, च्
व्यंजन किसे कहते हैं?
जिन वर्णों का उच्चारण स्वतंत्र रूप से नहीं किया जा सकता और जिनके उच्चारण के लिए स्वर की सहायता आवश्यक होती है, उन्हें व्यंजन कहते हैं।
उदाहरण—
क, ख, ग, घ, च, छ, ज, त, थ, द, प, फ, ब, भ, म आदि।
व्यंजन के साथ सामान्य रूप से किसी स्वर की ध्वनि जुड़ी होती है। उदाहरण—
क् + अ = क
प् + अ = प
व्यंजनों के उच्चारण के दौरान फेफड़ों से निकलने वाली वायु मुख के किसी न किसी भाग से बाधित होती है।
व्यंजन के प्रकार
हिंदी व्यंजनों को मुख्य रूप से तीन भागों में बांटा जाता है—
- स्पर्श व्यंजन
- अंतःस्थ व्यंजन
- ऊष्म व्यंजन
1. स्पर्श व्यंजन किसे कहते हैं?
जिन व्यंजनों का उच्चारण करते समय जीभ या मुख का कोई अंग कंठ, तालु, मूर्धा, दाँत या होंठ को स्पर्श करता है, उन्हें स्पर्श व्यंजन कहते हैं।
इन्हें वर्गीय व्यंजन भी कहा जाता है।
स्पर्श व्यंजन पांच वर्गों में बांटे जाते हैं।
क वर्ग
क, ख, ग, घ, ङ
इनका संबंध मुख्य रूप से कंठ से होता है।
च वर्ग
च, छ, ज, झ, ञ
इनका उच्चारण तालु से संबंधित होता है।
ट वर्ग
ट, ठ, ड, ढ, ण
इनका उच्चारण मूर्धा से संबंधित होता है।
त वर्ग
त, थ, द, ध, न
इनका उच्चारण दाँतों के संपर्क से होता है।
प वर्ग
प, फ, ब, भ, म
इनका उच्चारण मुख्य रूप से होंठों की सहायता से किया जाता है।
इस प्रकार पांचों वर्गों में कुल 25 स्पर्श व्यंजन होते हैं।
2. अंतःस्थ व्यंजन किसे कहते हैं?
‘अंतःस्थ’ शब्द का अर्थ है—बीच में स्थित।
जिन व्यंजनों का उच्चारण स्वर और व्यंजन के बीच की स्थिति जैसा होता है, उन्हें अंतःस्थ व्यंजन कहते हैं। इन्हें अर्द्धस्वर भी कहा जाता है।
अंतःस्थ व्यंजन चार होते हैं—
य, र, ल, व
इनका उच्चारण करते समय मुख के अंगों का पूर्ण स्पर्श नहीं होता। यही कारण है कि इन्हें अर्द्धस्वर भी कहा जाता है।
3. ऊष्म व्यंजन किसे कहते हैं?
जिन व्यंजनों के उच्चारण के दौरान वायु मुख के किसी भाग से घर्षण करती हुई बाहर निकलती है और गर्म हवा जैसा अनुभव उत्पन्न होता है, उन्हें ऊष्म व्यंजन कहा जाता है।
ऊष्म व्यंजन चार होते हैं—
श, ष, स, ह
इनके उच्चारण के समय वायु के घर्षण के कारण ऊष्मा उत्पन्न होती है। इसी कारण इन्हें ऊष्म या संघर्षी व्यंजन भी कहा जाता है।
इस प्रकार हिंदी वर्णमाला में वर्ण, स्वर, व्यंजन और उनके विभिन्न प्रकार भाषा की मूल संरचना को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वर्णों की सही जानकारी हिंदी पढ़ने, लिखने और शुद्ध उच्चारण सीखने के लिए आवश्यक आधार प्रदान करती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. वर्ण किसे कहते हैं?
भाषा की सबसे छोटी और अविभाज्य ध्वनि को वर्ण कहते हैं। वर्ण के और छोटे टुकड़े नहीं किए जा सकते, जैसे अ, आ, क, ख, ग आदि।
2. वर्णमाला किसे कहते हैं?
किसी भाषा के सभी वर्णों के क्रमबद्ध और व्यवस्थित समूह को वर्णमाला कहते हैं। उदाहरण के लिए, अ, आ, इ, ई और क, ख, ग आदि हिंदी वर्णमाला के भाग हैं।
3. वर्ण के कितने भेद होते हैं?
हिंदी भाषा में वर्ण मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं—स्वर और व्यंजन।
4. स्वर और व्यंजन में क्या अंतर है?
स्वर का उच्चारण स्वतंत्र रूप से किया जा सकता है, जबकि व्यंजन के उच्चारण के लिए सामान्यतः स्वर की सहायता की आवश्यकता होती है।
5. व्यंजन के कितने प्रकार होते हैं?
व्यंजन मुख्य रूप से तीन प्रकार के होते हैं—स्पर्श व्यंजन, अंतःस्थ व्यंजन और ऊष्म व्यंजन।
