संज्ञा के भेद (Sangya ke Bhed) हिन्दी व्याकरण का एक महत्वपूर्ण विषय है। हिन्दी में संज्ञा के कुल पाँच भेद माने जाते हैं। इनमें तीन मुख्य भेद हैं—व्यक्तिवाचक संज्ञा, जातिवाचक संज्ञा और भाववाचक संज्ञा। वहीं जातिवाचक संज्ञा को आगे दो भागों में विभाजित किया गया है—द्रव्यवाचक संज्ञा और समूहवाचक संज्ञा। इस प्रकार संज्ञा के भेद पाँच होते हैं, जिनकी सही जानकारी हिन्दी भाषा को शुद्ध रूप से पढ़ने, लिखने और समझने के लिए अत्यंत आवश्यक है।
3. द्रव्यवाचक संज्ञा
4. समूह वाचक संज्ञा
5. भाववाचक संज्ञा संज्ञा
1. व्यक्तिवाचक संज्ञा- Vyaktivachak Sangya
Vyaktivachak Sangya Kise Kahate Hain: वह शब्द जो किसी एक व्यक्ति, वस्तु, स्थान आदि का बोध करवाता है उसे व्यक्तिवाचक संज्ञा कहते है। जैसे- राम, श्याम, टेबल, कुर्सी, कार, दिल्ली, मुंम्बई आदि।
- राम– व्यक्ति का नाम है
- श्याम– व्यक्ति का नाम है
- टेबल– बैठक का एक साधन है किन्तु एक नाम को सूचित कर रहा है इसलिए यह व्यक्तिवाचक है।
- कुर्सी– बैठक का एक साधन है किन्तु एक नाम को सूचित कर रहा है इसलिए यह व्यक्तिवाचक है।
- कार– यातायात का एक साधन है , किन्तु सम्पूर्ण यातायात नहीं है कार एक माध्यम है।इसके कारन यह एक व्यक्ति को इंगित कर रहा है।
- दिल्ली– एक राज्य है किन्तु पूरा देश नहीं इसलिए यह व्यक्तिवाचक है।
- मुंम्बई– एक राज्य है किन्तु पूरा देश नहीं इसलिए यह व्यक्तिवाचक है।
Vyakti Vachak Sangya Ke Udaharan- व्यक्तिवाचक संज्ञा के उदाहरण
- पर्वतों के नाम जैसे – हिमालय, आल्पस, सतपुड़ा, आदि।
- महासागरों के नाम जैसे – हिन्द महासागर, काला सागर, लाल सागर, आदि।
- धार्मिक ग्रंथों के नाम जैस – रामायण, गीता, महाभारत, आदि।
- व्यक्तियों के नाम जैसे – राम, श्याम, मोहन आदि।
- देशों के नाम जैसे – भारत, चीन, भूटान, आदि।
- महीनों के नाम (अंगरेजी और हिंदी दोनों) जैसे – जनवरी, फ़रबरी, चैत्र, वैशाख आदि।
- ऐतिहासिक घटनाओं के नाम जैसे – 1857 की क्रांति, जलियावाला बाग हत्याकांड, चौरी-चौरा कांड, आदि।
2. जातिवाचक संज्ञा – Jativachak Sangya
Jativachak Sangya Kise Kahate Hain: जो संज्ञा किसी पूरी जाति या वर्ग का संकेत देती है, उसे जातिवाचक संज्ञा कहते हैं। जैसे– लड़का, लड़की, नदी, पर्वत आदि।
यहाँ लड़का शब्द किसी एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि सभी boys के लिए प्रयुक्त होता है। इसलिए यह जातिवाचक संज्ञा है। इसी प्रकार लड़की, नदी, पर्वत भी केवल एक के लिए नहीं, बल्कि पूरे वर्ग के लिए प्रयुक्त होते हैं।
जातिवाचक संज्ञा के दो भेद है-
- द्रव्यवाचक संज्ञा
- समूह वाचक संज्ञा।
Dravya Vachak Sangya
3. द्रव्यवाचक संज्ञा- Dravya Vachak Sangya
जिस Sangya शब्दों से किसी धातु, द्रव्य, सामग्री, पदार्थ आदि का बोध हो , उसे द्रव्यवाचक संज्ञा कहते है। जैसे- गेहूं, चावल, घी, सोना, चांदी, तांबा, ऊन आदि।
द्रव्यवाचक संज्ञा के उदाहरण- Dravya Vachak Sangya Ke Udaharan
गेहूं– भोजन की सामाग्री है।
चावल– भोजन की सामाग्री है।
घी– भोजन की सामाग्री है।
सोना– आभूषण के लिए एक द्रव्य या पदार्थ है।
चांदी– आभूषण के लिए एक पदार्थ है।
तांबा– एक धातु है।
ऊन– ऊन वस्त्र बनाने की एक सामाग्री है।
4. समूह वाचक संज्ञा या समुच्चयवाचक संज्ञा- Samuh Vachak Sangya
जिन संज्ञा शब्दों से किसी एक व्यक्ति का बोध न होकर पुरे समूह / समाज का बोध हो वह समूह वाचक / समुदायवाचक संज्ञा होता है। जैसे- सेना, पुलिस, पुस्तकालय, दल, समिति, आयोग, परिवार आदि।
Samuh Vachak Sangya Ke Udaharan- समूहवाचक संज्ञा के उदाहरण
समिति– अनेक व्यक्तिों से मिलकर एक समिति , या समूह का निर्माण होता है।
आयोग– आयोग का गठन किसी खास उद्देश्य के लिए किया जाता है , इसमें अनेक सदस्य होते है।
सेना– सेना में कई सैनिक होते है। यहाँ समूह की बात हो रही है।
पुलिस– पुलिस हर स्थान , राज्य , देश में होते है। उसी बड़े रूप को इंगित किया जा रहा है।
पुस्तकालय– पुस्तकालय में अनेक पुस्तक होते है। यहाँ किसी एक पुस्तक की बात नहीं हो रही है।
दल– अनेक व्यक्तिों से मिलकर एक दल , या समूह का निर्माण होता है।
परिवार– एक परिवार में अनेक सदस्य हो सकते है यहाँ तक की 2 -3 पीढ़ी भी।
5. भाववाचक संज्ञा (ABSTRACT NOUN IN HINDI)
जिन संज्ञा शब्दों से पदार्थों की अवस्था , गुण-दोष , धर्म , दशा , आदि का बोध हो वह भाववाचक संज्ञा कहलाता है। जैसे- बुढ़ापा, मिठास, क्रोध, हर्ष, यौवन, बालपन, मोटापा आदि।
Bhav Vachak Sangya Ke Udaharan- भाववाचक संज्ञा के उदाहरण
- बुढ़ापा– बुढ़ापा जीवन की एक अवस्था है।
- मिठास– मिठास मिठाई का गुण है।
- क्रोध– क्रोध एक भाव या दशा है।
- हर्ष– हर्ष एक भाव या दशा है।
- यौवन– यौवन स्त्री की एक दशा है।
- बालपन– बालपन बालक का गुण है अथवा एक दशा और अवस्था है।
- मोटापा– मोटापा एक अवस्था है जो मोटापे का इंगित करता है।
स्वतंत्र भाववाचक संज्ञा
जिन भाववाचक संज्ञा शब्दों में किसी भी प्रत्यय का प्रयोग नहीं होता है, उन्हें हम स्वतंत्र भाववाचक संज्ञा कहते हैं। जैसे – सुख, दुःख, रोग, प्रेम, प्यार, स्नेह, दुलार, संसार, भय, क्रोध आदि।
स्वतंत्र भाववाचक संज्ञा शब्दों में जब प्रत्यय जोड़ देते हैं तब यह विशेषण शब्द बन जाते हैं। जैसे:-
- सुख + ई = सुखी
- संसार + ई = संसारी
- प्रेम + ई = प्रेमी
- प्यार + आ = प्यारा
क्रियार्थक संज्ञा
जब किसी वाक्य के आरम्भ में कर्त्ता के रूप कोई क्रिया आये, तब उस क्रिया को क्रियार्थक संज्ञा कहते हैं। जैसे:-
- घूमना या टहलना स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है।
- पढ़ना एक अच्छा काम है।
उपरोक्त वाक्यों में घूमना, टहलना, पढ़ना आदि क्रियाओं का प्रयोग क्रियार्थक संज्ञा के रूप में हुआ है।
| ओकारान्त और एकारांत शब्दों का प्रयोग हमेशा वहुवचन में होता है। |
नियम 1. यदि कोई क्रिया वाचक शब्द वाक्य के शुरुआत में ओकारान्त बनकर आये तब यह ओकारान्त शब्द हमेशा जातिवाचक संज्ञा होता है। जैसे:-
- सोतों को मत जगाओ।
- हँसतों को मत रुलाओ।
- रोतों को हँसाओ।
नियम 2. जातिवाचक संज्ञा का कोई शब्द यदि वाक्य प्रयोग में व्यक्ति विशेष के प्रयोग को दर्शाता हो, तब वह शब्द वाक्य में व्यक्तिवाचक संज्ञा बन जाता है। जैसे:-
| मूलतः जातिवाचक संज्ञा | वाक्य में व्यक्तिवाचक संज्ञा के रूप में प्रयोग |
| नेताजी | नेताजी ने “जय हिंद” का नारा लगाया। |
| सरदार | सरदार को “लौह पुरुष” कहा जाता है। |
| मोदी | मोदी देश के प्रधानमंत्री हैं। |
| गांधी या बापू | गांधी या बापू अहिंसा के उपासक थे। |
नियम 3. व्यक्तिवाचक संज्ञा और भाववाचक संज्ञा हमेशा एकवचन होते हैं। इनको वहुवचन बनाने के लिए ओकारान्त और एकारांत का प्रयोग किया जाता है, और यह वहुवचन बनने के साथ जातिवाचक संज्ञा हो जाते हैं। जैसे:-
- विभीषण – विभीषणों
- जयचंद – जयचंदों
- प्रार्थना – प्रार्थनाएं
नियम 4. यदि कोई विशेषण शब्द आकारान्त हो तब वह ओकारान्त बनते हुए जातिवाचक संज्ञा का रूप ले लेता है। जैसे:-
- छोटा – छोटों
- बड़ा – बड़ों
नियम 5. व्यक्तिवाचक संज्ञा का यदि कोई शब्द वाक्य प्रयोग में अपने समान विशेषता को दर्शाये तब वह वाक्य में जातिवाचक संज्ञा बन जाता है। जैसे:-
- कश्मीर – प्रयागराज उत्तर प्रदेश का कश्मीर है।
- सेक्सपियर – कालिदास भारत के सेक्सपियर हैं।
- सीता और सावित्री – भारत में आज भी घर-घर में सीता और सावित्री पायी जातीं हैं।
- गंगा और लक्ष्मी – पूजा तो गंगा है और नेहा तो हमारे घर की लक्ष्मी है।